AKHAND MISHRA

Add To collaction

मां याद बहुत आती है

मां  याद बहुत आती है..

सिरहाने बैठकर तुम.. कितना दुलारती थीं..
बिन आंखें छपके एक-पल..एक-टक निहारती थीं..

सूकुन और राहत की.. छाया के जैसी ...
स्नेह लिए आंचल में...एक साया के जैसी .. 
ओहदे में ईश्वर का रूप ही तो लगती थी..
हर दर्द में मेरे वो आंसू बहाया करती थी.. 

कितना सहेजती थी..मेरे लिए वो सबकुछ..
संसार भर की खुशियां ..जैसे समेट लेती थी..
वो जैसे बातों में ही सब-कुछ समझ ही लेती थीं  

ना खुद की कोई चिंता.. परवाह नहीं क्षण भर..
हम सब के लिए जीती थी.. वो प्यार लिए दामन भर..
लिपटकर,लरझना.. हर बात उससे कहना...
कभी एक पल भी ..उसके बिना न रहना..

नजरे ना देखें मेरी...जब कभी उसे एक क्षण..
तो आंखों में अजब सी ..तलाश भर जाती थी..
बेवक्त चले जाने से ..दर्द भरा नस-नस में..
अब नींद नहीं आती है.. बस करवटें बदलते 
ये रात गुजर जाती है..

इस बेदर्दी वक्त ने ..इस कदर उसको छीना...
बस देखने को अब तो.. ये आंखें तरस जाती हैं....
मां..याद बहुत आती है...

__अखण्ड मिश्रा 
(स्वरचित, मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित)
  संग्रह - मां... तुम्हारी यादें...

(Note- Writing or Posting This Post Anywhere Without The Real Name Of The Author is Punishable Under The CopyRight Act 1957. All Rights Reserved.)

   11
8 Comments

जबरदस्त

Reply

AKHAND MISHRA

21-May-2023 10:45 AM

आभार आपका आदरणीय

Reply

shahil khan

19-May-2023 08:51 AM

Nice

Reply

AKHAND MISHRA

21-May-2023 10:44 AM

धन्यवाद

Reply

Abhinav ji

18-May-2023 09:03 AM

Very nice 👍

Reply

AKHAND MISHRA

18-May-2023 01:23 PM

आभार आपका

Reply

Reena yadav

19-May-2023 04:39 AM

Shukriya 😇

Reply